Goa
Goa ,एक ऐसी डेस्टिनेशन जो सबको पसंद आती है।गोवा मै ४० बीच है। आज तक सिर्फ़ गोवा कि खूबसूरती के बारे मै सुना था पर देखा नही था।बहुत अच्छा लग रहा था की फाइनली हम जा रहे थे।दिल्ली से गोवा १८०० किलों मीटर की दूरी है।
हमने दिल्ली एअरपोर्ट से फ्लाइट लि गोवा के लिए ओर करीब डेढ़ घंटे मै पहुंच गए पणजी एअरपोर्ट।
एयरपोर्ट पहुंचते ही हमने टैक्सी बुक कराई और करीब शाम के ५:३० बजे तक हम अपने होटल पहुंचे। होटल पहुंचते ही हमारा बहुत स्वागत किया गया और हमे फूलों की माला पहनाई गई। डाइनिंग एरिया मै पहुंच कर हमने नाश्ते मै कुछ स्नैक्स लिया। होटल की तरफ से हमे जीप से सनसेट दिखाने के लिए ले जाया गया। बीच पर पहुंचते ही मै तो खुशी से दौड़ पड़ी । इतना सुंदर बीच तो मैंने कहीं नहीं देखा था। जहा समुद्र, आसमान और सूर्य सब एक साथ दिख रहे थे।इस बीच का नाम था त्रिवोलि जो की बागा ओर कलेंगुटे बीच से सटा नॉर्थ गोवा मै है।
एयरपोर्ट पहुंचते ही हमने टैक्सी बुक कराई और करीब शाम के ५:३० बजे तक हम अपने होटल पहुंचे। होटल पहुंचते ही हमारा बहुत स्वागत किया गया और हमे फूलों की माला पहनाई गई। डाइनिंग एरिया मै पहुंच कर हमने नाश्ते मै कुछ स्नैक्स लिया। होटल की तरफ से हमे जीप से सनसेट दिखाने के लिए ले जाया गया। बीच पर पहुंचते ही मै तो खुशी से दौड़ पड़ी । इतना सुंदर बीच तो मैंने कहीं नहीं देखा था। जहा समुद्र, आसमान और सूर्य सब एक साथ दिख रहे थे।इस बीच का नाम था त्रिवोलि जो की बागा ओर कलेंगुटे बीच से सटा नॉर्थ गोवा मै है।
यहां किनारे पर काफी छोटे छोटे रेस्ट्रों होते है, जहां हमने कैंडल लाइट डिनर किया ।रात के १० बजे हम होटल आए और आराम किया।
अगले दिन हमने एक कार रेंट पर लि,ताकि हम गोवा घूम सके।फिर क्या था, हमने होटल मै ब्रेकफास्ट किया ओर कार से निकल गए घूमने। पास मै ही चोपड़ा फोर्ट था।हमने कार पार्क की ओर देखने चले गए।इसे तो हमने कई बार पिक्चर्स मै भी देखा है।
गोवा मै गर्मी बहुत होती है।तो हम वह से निकल गए अपनी दूसरी डेस्टिनेशन ,पर जो की साउथ गोवा के पंजीम शहर मै , बहुत ही मशहूर चर्च जो १७०९ मै इसका निर्माण हुआ था । सफ़द रंग की पुरानी बिल्डिंग आज भी नई दिख रही थी।बहुत भव्या निर्माण किया गया था इस कैथलिक चर्च का।हमने भी वहा प्रेयर की।
वहा हमने कुछ फोटोज भी खिंचवाई। ये जगह किसी फॉरेन कंट्री से कम नहीं लग रही थी।अब हमने सोचा, की क्यों न पंजिम शहर भी घूम लिया जाए।पंजिम शहर गोवा का सबसे पुराना शहर है। यहां के घरों का आर्किटेक्ट बहुत सुंदर लगता है। ऐसा लगता हैं मानो की हम फ्रांस पहुंच गए हो।
साउथ गोवा मै बहुत सारे सी बीच्स है जैसे मार्जोम, कैंडोलियम, बैनोलियम, पलोनियम आदि। वैसे तो सभी किनारे बहुत ही सुंदर है लेकिन मुझे सबसे सुंदर और आकर्षक लगा पैनलोनियम बीच। जहां डूबता सूरज अपने अलग अलग रंग दिखा रहा था।दोनों तरफ छोटे टापू और उसके बिच मै समुंद्र और उपर सूरज ,अपनी किरणों को बिखेर रहा था।बहुत ही मनोरम दृश्य था।ये बीच साउथ गोवा मै हैं।
यहां आकर जाने का तो मन ही नही कर रहा था। ओर हमें साउथ गोवा से नॉर्थ गोवा जाना था क्योंकि हमारा होटल कलेंगुटे बीच के पास नॉर्थ मै था , जो की२५ किलोमीटर की दूरी पर था।हम वहा से निकल गए। रास्ते मै हमने देखा की, एक ओर समूद
का किनारा नज़र आ रहा है। फिर क्या था हमने अपनी गाड़ी रोकी और चल दिए देखने के लिए। वहा जाने का रस्ता जंगल की तरह दिख रहा था।वहा पहुंच कर हम तो दंग ही रह गए।क्या खूबसूरत नज़रा था। चारों तरफ प्राकृतिक सौंदर्य नजर आ रहा था।वहा किनारे पर कोई क्रिक्रेट खेल रहा था,तो कोई वॉक की रहा था,तो कोई समुद्र के अल्फा का आनंद ले रहा था।हमारी तो सारी थकान हो खतम हो गई।बीच का नाम तो नही पता लेकिन आप फोटो से पहचान जायेगे।क्या हसीन नजारा था,समुद्र का किनारा,डूबता सूरज अपनी लालिमा बिखेरता हुआ और जंगल वाली फीलिंग दिल को बहुत सुकून पहुंचा रही थी।मानो धरती का स्वर्ग यही हो।हमने वहा बहुत एन्जॉय किया।कुछ तस्वीरें भी ली।
रास्ते मै कई जगह थी पर अब अंधेरा हो गया था।जल्द ही हमे अपने होटल भी पहुंचना था।करीब रात के १०: ३०बजे हम अपने होटल पहुंचे। पहुंचते ही हमने डिनर किया।हमारा होटल रूम बहुत ही कंफर्टेबल था,जिसके कारण हमे वहा आराम बहुत लगता था।कही से भी आते घूम के तो रूम मैं सारी थकान मिट जाती थी। गोवा मै कई जगह है,घूमने के लिए पर हमारे पास समय कम था।तो कई जगह हम एक्सप्लोर नही कर पाए।हम अक्टूबर माह मै गए थे। सितंबर ओर अक्टूबर माह मै बारिश बहुत होती है।अगले दिन तो बारिश के चलते हम कही जा न सके।उस दिन हमने पूरे दिन आराम किया। उसके अगले दिन, सुबह १० बजे हमे एयरपोर्ट जाना था। हमारी फ्लाइट थी वापस दिल्ली लौटने की। बिल्कुल भी मन नहीं था आने का।बस टैक्सी लिए ओर पहुंच गए एयरपोर्ट। आंखो मै, सागर को , समाए चले जा रही थी।वो सुनहरी धूप और सागर का ठंडा पानी जो बार बार मेरे पैरो मै लगता था और मुझे खो देता था अपनी चंचल लहरों मैं, भूल जाति थी अपने आप को उन लहरों मैं,बस इस खुआवब को लिए जा रही थी।मेरी गोवा यात्रा वृत्तांत समाप्त नहीं हुई है।अब मैं आपको इसे अपने अगले भाग मै बताऊंगी।
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